भारत में मनाये जाने वाले अधिकतम महत्वपूर्ण त्यौहार कार्तिक कृष्ण पक्ष मात्र में आते है। हिंदू धर्म के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा का भी अपना एक अलग महत्व होता हैं। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 23 नवंबर को मनाई जा रही हैं। प्रत्येक वर्ष पंद्रह पूर्णिमाएं मनाई जाती हैं। पुराणों में इस दिन स्नान,व्रत व तप की दृष्टि से मोक्ष मिलता हैं।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व

हिन्दी पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहा जाता है। इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। इस दिन शिवजी ने त्रिपुरासुर नाम के दैत्य का वध किया था, इस कारण इसे त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहते हैं। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा पर ही भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार भी लिया था। इस दिन सभी देवी-देवता भगवान विष्णु को जगाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही सभी देवी-देवता भगवान विष्णु के संग माता लक्ष्मी जी की पूजा भी करी जाती हैं।

पूजा करने की विधि

इस दिन विष्णु भगवान की पूजा करी जाती हैं। भगवान विष्णु को केसर के दूध से स्नान कराकर षोडशोपचार पूजन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। इससे धन, सुख, वैभव, संपत्ति की मनोकामना पूरी होती है।

इस पूर्णिमा पर क्या करें
  • सुबह उठकर व्रत का संकल्प करें। और फिर किसी पवित्र नदियों में स्नान करें और स्नान के बाद दीपदान, पूजा, आरती और दान करें।
  • अगर आप पवित्र नदी में स्नान नहीं कर सकते हैं तो पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। और स्नान के बाद सूर्य को जल चढ़ाएं। और सत्यनारायण की कथा करें।
  • इस दिन गरीबों को फल, अनाज, दाल, चावल, गरम वस्त्र आदि चीजों का दान करें।
  • इस दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करें।
  • कार्तिक पूर्णिमा पर दिया गया दान पापों को नष्ट करता हैं।

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